नाभिकीय संलयन लागत मॉडल व्यवहार्य होने के लिए अत्यधिक आशावादी: विशेषज्ञों की चेतावनी

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • वैज्ञानिकों ने पाया है कि निवेशक नाभिकीय संलयन की अनुभव दर का अधिक आकलन कर रहे हैं।

परिचय

  • नाभिकीय संलयन की अनुभव दर से तात्पर्य है कि संलयन तकनीक की लागत या दक्षता संचित अनुभव के साथ किस प्रकार सुधरती है।
  • वर्तमान नाभिकीय संलयन मॉडल प्रायः 8% से 20% तक की अनुभव दर मानते हैं।
    • इकाई आकार, डिज़ाइन की जटिलता और अनुकूलन की आवश्यकता का परीक्षण करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि संलयन विद्युत संयंत्रों में अनुभव दर संभवतः 2% से 8% के बीच होगी।

नाभिकीय संलयन क्या है?

  • नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो हल्के परमाणु नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं और विशाल ऊर्जा का उत्सर्जन होता है।
  • संलयन अभिक्रियाएँ प्लाज़्मा नामक पदार्थ की अवस्था में होती हैं — यह एक गरम, आवेशित गैस है जिसमें धनायन और स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिनके गुण ठोस, द्रव या गैस से भिन्न होते हैं।
  • सूर्य और अन्य सभी तारे इसी प्रक्रिया से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
  • प्रक्रिया: ड्यूटेरियम (H-2) और ट्रिटियम (H-3) परमाणु मिलकर हीलियम (He-4) बनाते हैं। इसके साथ एक मुक्त एवं तीव्र गति वाला न्यूट्रॉन भी उत्सर्जित होता है।
    • न्यूट्रॉन को वह गतिज ऊर्जा प्राप्त होती है जो ड्यूटेरियम और ट्रिटियम के हल्के नाभिकों के संयोजन के बाद बची हुई ‘अतिरिक्त’ द्रव्यमान से परिवर्तित होती है।

संलयन ऊर्जा की चुनौतियाँ

  • अत्यधिक तापमान आवश्यकता: संलयन प्रारंभ और बनाए रखने हेतु लगभग 100 मिलियन °C तापमान चाहिए।
  • प्लाज़्मा अस्थिरता: गरम प्लाज़्मा अत्यधिक अस्थिर होता है और उसे नियंत्रित करना कठिन है।
  • चुंबकीय नियंत्रण की जटिलता: टोकामक जैसे उन्नत प्रणालियाँ तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और महँगी हैं।
  • शुद्ध ऊर्जा लाभ की समस्या: इनपुट से अधिक सतत ऊर्जा उत्पादन प्राप्त करना अभी भी कठिन है।
  • सामग्री का क्षरण: रिएक्टर की दीवारें तीव्र न्यूट्रॉन विकिरण और ऊष्मा क्षति का सामना करती हैं।
  • उच्च लागत एवं लंबी अवधि: ITER जैसे परियोजनाओं हेतु विशाल वित्तपोषण और दशकों का विकास समय आवश्यक है।

संलयन ऊर्जा का महत्व

  • स्वच्छ ऊर्जा: नाभिकीय संलयन, विखंडन की तरह, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करता। यह इस शताब्दी के उत्तरार्ध से दीर्घकालिक निम्न-कार्बन विद्युत स्रोत बन सकता है।
  • अधिक दक्ष: संलयन प्रति किलोग्राम ईंधन से विखंडन की तुलना में चार गुना अधिक ऊर्जा और तेल या कोयला जलाने की तुलना में लगभग चार मिलियन गुना अधिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।
  • प्रचुर एवं सुलभ ईंधन: ड्यूटेरियम समुद्री जल से सस्ते में निकाला जा सकता है और ट्रिटियम को संलयन से उत्पन्न न्यूट्रॉनों की प्राकृतिक लिथियम के साथ अभिक्रिया से बनाया जा सकता है। ये ईंधन आपूर्ति लाखों वर्षों तक पर्याप्त होंगी।
  • सुरक्षित उपयोग: भावी संलयन रिएक्टर स्वभावतः सुरक्षित होंगे और उच्च सक्रियता या दीर्घजीवी नाभिकीय अपशिष्ट उत्पन्न नहीं करेंगे। साथ ही, संलयन प्रक्रिया प्रारंभ और बनाए रखना कठिन है, इसलिए अनियंत्रित अभिक्रिया या मेल्टडाउन का कोई जोखिम नहीं है।

नाभिकीय संलयन और विखंडन में अंतर

स्रोत: TH

 

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